22/07/2017

रक्षाबंधन 2017 मनाने शुभ समय!

रक्षाबंधन 2017 मनाने शुभ समय!
रक्षा बंधन भाई-बहन के बीच के प्यार को बढाता है। हर भाई का यह कर्तव्य है की वह अपनी बहन की रक्षा करे। बहन भी राखी के दिन अपने भाई के अच्छे, सफल और सुरक्षित भविष्य की कामना करती है। भाई भी अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करने का वचन देता है। इससे एक स्वस्थ पारिवारिक रिश्ते का निर्माण होता है।
त्यौहार परिवार में प्यार और खुशियाँ बढ़ाने के लिये मनाये जाते है। राखी का त्यौहार भी ऐसे ही त्योहारों में से एक है। यह भाई और बहन के रिश्ते का त्यौहार है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास में पूर्ण चंद्रमा की रात को राखी पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन भाई और बहन दोनों नये कपडे पहनते है। राखी बांधने के बाद भाई अपनी बहन को उपहार (गिफ्ट) भी देता है।
यह एक ऐसा त्यौहार जिसका ज्यादातर संबंध भारत के उत्तर और पश्चिमी क्षेत्रो से है लेकिन देश के सभी राज्यों में इस त्यौहार को बहुत से समुदाय के लोग ख़ुशी से मनाते है। धार्मिक त्यौहार भले ही अलग-अलग मनाये जाते हो लेकिन रक्षा बंधन का त्यौहार पुरे देश में एकसाथ मनाया जाता है।

यह त्यौहार हिन्दुओ में आम त्यौहार की ही तरह है। हिन्दू के अलावा इसे सिक्ख, जैन और दुसरे समुदाय के लोग भी ख़ुशी से मनाते है।
रक्षा बंधन को भारत के सभी राज्यों में अलग-अलग नाम से जानते है, अलग-अलग समुदाय के लोग इसे अलग-अलग नाम से मनाते है। दक्षिणी और उत्तरी क्षेत्रो में इसे अलग तरह से मनाया जाता है। उत्तरी और उत्तरी-पश्चिमी भारत में राखी के त्यौहार को बड़े जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
पश्चिमी घाटो में और गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के भी कुछ भागो में इसे पूर्ण चंद्रमा के रात की नारियल पूर्णिमा कहा जाता है।
झारखण्ड, बिहार, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में रक्षा बंधन को श्रावणी या कजरी पूर्णिमा भी कहते है। किसानो, महिलाओ और जिन्हें संतान है उनके लिये रक्षाबंधन एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। रक्षाबंधन के दिन को गुजरात में पवित्रोपना के नाम से मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन लोग भगवान शिव की विशाल पूजा अर्चना भी करते है।
परंपराओ के अनुसार इस दिन बहन दिया लगाकर, रोली, चावल और राखी से पूजा की थाली तैयार करती है। वह भगवान की पूजा करती है और अपने भैया के हाँथो (कलाई) पर राखी बाँधती है। भाई भी राखी बंधाने के बाद बहन को उसकी सुरक्षा का वचन देता है और अपनी तरफ से उसे कोई उपहार देता है।
बहुत से शहरो में मेला लगता है, जहाँ सुंदर-सुंदर राखियाँ बेचीं जाती है। महिलाये और लडकियाँ मेले में जाती है और अपने भाइयो के लिये पसंदीदा राखी खरीदती है। कुछ लडकियाँ अपने भाइयो के लिये घर पर ही अपने हाथो से राखी बनाती है।
राखी के दिन महिलाये और लडकियाँ सुबह जल्दी उठती है और लजीज खाना और स्वादिष्ट पकवान बनाना शुरू करती है और अपने भाइयो के लिये पसंदीदा खाना बनाती है।
इसी तरह से इस त्यौहार को पुरे देश में सभी समुदाय के लोग मनाते है। रक्षाबंधन के त्यौहार पर कोई बड़े जश्न का आयोजन करता है तो कोई घर में ही इस त्यौहार को मनाते है। असल में देखा जाये तो रक्षा बंधन उत्तर भारत का त्यौहार है लेकिन इसके महत्त्व को देखते हुए पुरे भारत में लोग इसे अपनी इच्छानुसार मनाते है। भारत में मनाये जाने वाले दुसरे त्योहारों की तरह ही रक्षाबंधन भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
क्षाबंधन 2017 मनाने शुभ समय!

राखी टिंगिंग समारोह के लिए शुभ मुहूर्त 11:04 से 21:12
राखी टिंगिंग समारोह के लिए कुल अवधि 10 घंटे और 8 मिनट
रक्षा बंधन के दौरान अपराह्न समय 2017 13:46 से 16:24
अपारहन अवधि 2 घंटे 38 मिनट
रक्षाबंधन के दौरान प्रदोष समय 2017 समारोह 19:03 से 21:12
प्रदोष की अवधि 2 मिनट
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 6 अगस्त 2017 को 22:28 बजे
पूर्णिमा तिथि का अंत 7 अगस्त, 2017 को 23:40
इस तरह से राखी का त्यौहार भाई-बहन के बीच के रिश्ते को और मजबूत बना

21/07/2017

Sawan Shivratri 2017

: शिवलिंग पर जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त, जानिए पूजन का सही समय

Sawan Shivratri 2017

2017-07-20 12:41:3

का महीना यानि भगवान शिव की आराधना का विशेष माह। इस माह में भगवान शिव की आराधना के लिए भक्त लालायित रहते हैं, लेकिन विशेष पूजा होती है सावन माह में पड़ने वाली शिवरात्रि को। वैसे तो शिवरात्रि हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है, लेकिन साल में दो बार आने वाली विशेष शिवरात्रि का हिंदू परंपरा में बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान है।


दो बार आती है शिवरात्रि
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि फाल्गुन महीने में कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसके अलावा दूसरी बार सावन महीने में कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को भी भगवान शंकर की आराधना के साथ शिवरात्रि मनाई जाती है। आस्था यह है कि शिवरात्रि को पूजा आराधना करने से दस गुना पुण्य मिलता है, वहीं भगवान शिव हर मुराद पूरी करते हैं। 

21 जुलाई को शिवरात्रि
सावन की शिवरात्रि शुक्रवार यानि 21 जुलाई को पड़ रही है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि 21 जुलाई को रात्रि 9. 49 मिनट से चतुर्दशी तिथि आरंभ होगी और अगले दिन यानी कि 22 जुलाई को 6.27 मिनट तक रहेगी। इस शुभ समय में भगवान शिव का पूजन कर हर मनोकामना पूरी की जा सकती है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सावन माह के प्रारंभ होते ही सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु विश्राम के लिए अपने लोक चले जाते हैं और अपना सारा कार्यभार भगवान शिव को सौंप देते हैं। भगवान शिव माता पार्वती के संग पृथ्वी लोक पर रहकर समस्त धरतीवासियों के संरक्षण का काम करते हैं।