एक युवती बगीचे में मेरे पति


एक युवती बगीचे में
बहुत गुस्से में बैठी थी , पास ही एक बुजुर्ग बैठे थे उन्होने उस परेशान युवती से पूछा क्या हुआ बेटी ? क्यूं इतना परेशान हो ?
युवती ने गुस्से में अपने पति की गल्तीयों के बारे में बताया
बुजुर्ग ने मंद मंद मुस्कराते हुए युवती से पूछा बेटी क्या तुम बता सकती हो तुम्हारे घर का नौकर कौन है ?
युवती ने हैरानी से पूछा क्या मतलब ?
बुजुर्ग ने कहा :- तुम्हारे घर की सारी जरूरतों का ध्यान रख कर उनको पूरा कौन करता है ?
युवती :- मेरे पति
बुजुर्ग ने पूछा :- तुम्हारे खाने पीने की और पहनने ओढ़ने की जरूरतों को कौन पूरा करता है ?
युवती :- मेरे पति
बुजुर्ग :- तुम्हें और बच्चों को किसी बात की कमी ना हो और तुम सबका भविष्य सुरक्षित रहे इसके लिए हमेशा चिंतित कौन रहता है ?

युवती :- मेरे पति
बुजुर्ग ने फिर पूछा :- सुबह से शाम तक कुछ रुपयों के लिए बाहर वालों की और अपने अधिकारियों की खरी खोटी हमेशा कौन सुनता है ?
युवती :- मेरे पति
बुजुर्ग :- परेशानी ऒर गम में कॊन साथ देता है ?
युवती :- मेरे पति
बुजुर्ग :- तुम लोगोँ के अच्छे जीवन और रहन सहन के लिए दूरदराज जाकर, सारे सगे संबंधियों को यहां तक अपने माँ बाप को भी छोड़कर जंगलों में भी नौकरी करने को कौन तैयार होता है ?

युवती :- मेरे पति
बुजुर्ग :- घर के गैस बिजली पानी, मकान, मरम्मत एवं रखरखाव, सुख सुविधाओं, दवाईयों, किराना, मनोरंजन भविष्य के लिए बचत, बैंक, बीमा, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, पास पड़ोस, ऑफिस और ऐसी ही ना जाने कितनी सारी जिम्मेदारियों को एक साथ लेकर कौन चलता है ?
युवती :- मेरे पति
बुजुर्ग :- बीमारी में तुम्हारा ध्यान ऒर सेवा कॊन करता है ?
युवती :- मेरे पति
बुजुर्ग बोले :- एक बात ऒर बताओ तुम्हारे पति इतना काम ऒर सबका ध्यान रखते है क्या कभी उसने तुमसे इस बात के पैसे लिए ?
युवती :- कभी नहीं
इस बात पर बुजुर्ग बोले कि पति की एक कमी तुम्हें नजर आ गई मगर उसकी इतनी सारी खुबियां तुम्हें कभी नजर नही आई ?
आखिर पत्नी के लिए पति क्यों जरूरी है ?
मानो न मानो जब तुम दुःखी हो तो वो तुम्हे कभी अकेला नहीं छोड़ेगा।
वो अपने दुःख अपने ही मन में रखता है लेकिन तुम्हें नहीं बताता ताकि तुम दुखी ना हो।
हर वक्त, हर दिन तुम्हे कुछ अच्छी बातें सिखाने की कोशिश करता रहता है ताकि वो कुछ समय शान्ति के साथ घर पर व्यतीत कर सके और दिन भर की परेशानियों को भूला सके।
हर छोटी छोटी बात पर तुमसे झगड़ा तो कर सकता है, तुम्हें दो बातें बोल भी लेगा परंतु किसी और को तुम्हारे लिए कभी कुछ नहीं बोलने देगा।
🌹 तुम्हें आर्थिक मजबूती देगा और तुम्हारा भविष्य भी सुरक्षित करेगा।
🌹 कुछ भी अच्छा ना हो फिर भी तुम्हें यही कहेगा- चिन्ता मत करो, सब ठीक हो जाएगा।।
🌹 माँ बाप के बाद तुम्हारा पूरा ध्यान रखना और तुम्हे हर प्रकार की सुविधा और सुरक्षा देने का काम करेगा।
🌹 तुम्हें समय का पाबंद बनाएगा।
🌹 तुम्हे चिंता ना हो इसलिए दिन भर परेशानियों में घिरे होने पर भी तुम्हारे 15 बार फ़ोन करने पर भी सुनेगा और हर समस्या का समाधान करेगा।

🌹 चूंकि पति ईश्वर का दिया एक स्पेशल उपहार है, इसलिए उसकी उपयोगिता जानो और उसकी देखभाल करो।
👸 ये मैसेज हर विवाहित स्त्री के 📱 मोबाइल मे होना चाहिए, ताकि उन्हें अपनी पति के महत्व का अंदाजा हो।
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कल रात मैंने एक "सपना" देखा.! मेरी Death हो गई....


जीवन में कुछ अच्छे कर्म किये होंगे
 इसलिये यमराज मुझे
 स्वर्ग में ले गये...

देवराज इंद्र ने
 मुस्कुराकर
मेरा स्वागत किया...

मेरे हाथ में 
Bag देखकर पूछने लगे

''इसमें क्या है..?"


मैंने कहा...
'' इसमें मेरे जीवन भर की कमाई है, पांच करोड़ रूपये हैं ।"


इन्द्र ने 
'BRP-16011966'
 नम्बर के Locker की ओर
 इशारा करते हुए कहा-
''आपकी अमानत इसमें रख
दीजिये..!''

मैंने Bag रख दी...

मुझे एक Room भी दिया...

मैं Fresh होकर
 Market में निकला...

 देवलोक के 
Shopping मॉल मे
 अदभूत वस्तुएं देखकर
 मेरा मन ललचा गया..!

मैंने कुछ चीजें पसन्द करके
Basket में डाली,
 और काउंटर पर जाकर
 उन्हें हजार हजार के
करारे नोटें देने लगा...

Manager ने 
नोटों को देखकर कहा,
''यह करेंसी यहाँ नहीं चलती..!''

यह सुनकर 
मैं हैरान रह गया..!

मैंने इंद्र के पास 
Complaint की
इंद्र ने मुस्कुराते हुए कहा कि,
''आप व्यापारी होकर
 इतना भी नहीं जानते..?
कि आपकी करेंसी
बाजु के मुल्क
पाकिस्तान,
 श्रीलंका
 और बांगलादेश में भी
 नही चलती...

और आप
 मृत्यूलोक की करेंसी
स्वर्गलोक में चलाने की
 मूर्खता कर रहे हो..?''


 यह सब सुनकर 
मुझे मानो साँप सूंघ गया..!

मैं जोर जोर से दहाड़े मारकर
रोने लगा.
और परमात्मा से
दरखास्त करने लगा, 
''हे भगवान्.ये...
 क्या हो गया.?''
''मैंने कितनी मेहनत से
 ये पैसा कमाया..!''
''दिन नही देखा, 
रात नही देखा,"
'' पैसा कमाया...!''

''माँ बाप की सेवा नही की,
पैसा कमाया,
बच्चों की परवरीश नही की,
पैसा कमाया....
 पत्नी की सेहत की ओर
ध्यान नही दिया, 
पैसा कमाया...!''

''रिश्तेदार, 
भाईबन्द, 
परिवार और
यार दोस्तों से भी 
किसी तरह की
हमदर्दी न रखते हुए
पैसा कमाया.!!"

''जीवन भर हाय पैसा
हाय पैसा किया...!
ना चैन से सोया, 
ना चैन से खाया...
 बस,
 जिंदगी भर पैसा कमाया.!''

''और यह सब 
व्यर्थ गया..?''

''हाय राम,
 अब क्या होगा..!''

इंद्र ने कहा,-
''रोने से 
कुछ हासिल होने वाला
नहीं है.!! "
"जिन जिन लोगो ने
 यहाँ जितना भी पैसा लाया,
 सब रद्दी हो गया।"

"जमशेद जी टाटा के
 55 हजार करोड़ रूपये,
बिरला जी के
 47 हजार करोड़ रूपये,
 धीरू भाई अम्बानी के
 29 हजार करोड़
अमेरिकन डॉलर...!
  सबका पैसा यहां पड़ा है...!"

मैंने इंद्र से पूछा-
"फिर यहां पर 
कौनसी करेंसी
चलती है..?"


इंद्र ने कहा-
"धरती पर अगर 
कुछ अच्छे कर्म
किये है...!

जैसे किसी दुखियारे को
मदद की, 
किसी रोते हुए को
हसाया, 
किसी गरीब बच्ची की
शादी कर दी, 
किसी अनाथ बच्चे को
 पढ़ा लिखा कर 
काबिल बनाया...! 
किसी को 
व्यसनमुक्त किया...!
 किसी अपंग स्कुल, वृद्धाश्रम या 
मंदिरों में दान धर्म किया...!"

"ऐसे पूण्य कर्म करने वालों को
यहाँ पर एक Credit Card
मिलता है...!
और 
उसे वापर कर आप यहाँ
स्वर्गीय सुख का उपभोग ले
सकते है..!''


मैंने कहा,
"भगवन....
 मुझे यह पता
नहीं था. 
इसलिए मैंने अपना जीवन 
व्यर्थ गँवा दिया.!!"

"हे प्रभु, 
मुझे थोडा आयुष्य दीजिये..!''

 और मैं गिड़गिड़ाने लगा.!

इंद्र को मुझ पर दया आ गई.!!

इंद्र ने तथास्तु कहा 
और मेरी नींद खुल गयी..!

मैं जाग गया..!

अब मैं वो दौलत कमाऊँगा
जो वहाँ चलेगी..!!

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🙏
नोट : रचना किसी और की है मैंने तो आप तक पहुंचाने में सिर्फ मेरी उंगलियों का इस्तेमाल किया है।  

मैथिल ब्राह्मण

मैथिल ब्राह्मणों का नाम मिथिला के नाम पर पड़ा है। मिथिला के ब्राह्मणो को मैथिल ब्राह्मण कहा जाता है |
 मिथिला भारत का प्राचीन प्रदेश है |
जिसमे बिहार का तिरहुत, सारन तथा पूर्णिया के आधुनिक ज़िलों का एक बड़ा भाग और नेपाल से सटे प्रदेशों के भाग भी शामिल हैं। जनकपुर , दरभंगा और मधुबनी मैथिल ब्राह्मणो का प्रमुख सांस्कृत केंन्द्र है |
मैथिल ब्राह्मण बिहार , नेपाल , ब्रज उत्तर प्रदेश व झारखण्ड के देवघर मे अधिक है |
 पंच गौड़ ब्राह्मणो के अंतर्गत मैथिल ब्राह्मण , कान्यकुब्ज_ब्राह्मण, सारस्वत ब्राह्मण , गौड़ ब्राह्मण , उत्कल ब्राह्मण है |

ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण
ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण वे ब्राह्मण हैं जो गयासुद्दीन तुग़लक़ से लेकर अकबर के शासन काल तक तिरहुत (मिथिला) से तत्कलीन भारत की राजधानी आगरा मे बसे तथा समयोपरान्त केन्द्रीय ब्रज के तीन जिलो मे औरङ्जेब के कुशासन से प्रताडित होकर बस गये। ब्रज मे पाये जाने वाले मैथिल ब्राह्मण उसी समय से ब्रज मे प्रवास कर रहे है। जो कि मिथिला के गणमान्य विद्वानो द्वारा शोधोपरान्त ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मणो के नाम से ज्ञात हुए। ये ब्राह्मण ब्रज के आगरा, अलीगद, मथुरा और हाथरस मे प्रमुख रूप से रहते है। यहा से भी प्रवासित होकर यह दिल्ली, अजमेर्, जयपुर, जोधपुर्, बीकानेर्, बडौदरा, दाहौद्, लख्ननऊ, कानपुर आदि स्थानो पर रह रहे है। मुग़ल शासक औरंगज़ेब ने मिथिला सहित सम्पूर्ण भारत पर अपने शासन काल में अत्याचार किया इसके अत्याचार से पीड़ित होकर बहुत से मिथिलावासी ब्राह्मण मिथिला से पलायन कर अन्य प्रदेशों में बस गए ब्रिज प्रदेश में रहने वाले मैथिलों व मिथिलावासी मैथिलों का आवागमन भी बंद हो गया ऐसा १६५८ ई० से लेकर १८५७ की क्रान्ति तक चलता रहा . १८५७ ई० के बाद भारतीय समाज सुधारकों ने एक आजाद भारत का सपना देखा था मिथिला के ब्राह्मण समाज भी आजाद भारत का सपना देखने लगे 'स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने ठीक इसी समय जाती उत्थान की आवाज को बुलंद किया उन्होंने जाती उत्थान के लिए सम्पूर्ण भारत में बसे मिथिला वासियों से संपर्क किया जिसका परिणाम यह हुआ की औरंगज़ेब के समय में मिथिलावासी और प्रवासी मैथिल ब्राह्मणों के जो सम्बन्ध टूट गए थे वह फिर से चालु हो गए उन्ही के प्रयासों से अलीगढ के मैथिल ब्राह्मणों का मिथिला जाना और मिथिलावासियों का अलीगढ आना संभव हुआ इसी समय स्वामी जी ने मिथिला से लौटकर अलीगढ में मैथिल सिद्धांत सभा का आयोजन किया सिद्धांत सभा के कार्यकर्ताओं और मिथिलावासी रुना झा द्वारा १८८२ से १८८६ के बीच पत्र व्यवहार आरम्भ हुआ
पंजी व्यवस्था
मैथिल ब्राह्मणो मे पंजी व्यवस्था है जो मैथिल ब्राह्मणो और मैथिल कायस्थो कि वंशावली लिखित रूप से रखती है आज कल यह प्रथा समाप्त हो रही है |
मैथिल ब्राह्मणो के उपनाम व वयवस्था
झा , मिश्र , पाठक ,औझा , शर्मा , चौधरी , ठाकुर , राँय , परिहस्त , कुंवर है | जिसमे से कुंवर , चौधरी , ठाकुर मिथिला देश मे ब्राह्मणो ( मैथिल और भूमिहार ) के अलावा कोई अन्य नही प्रयुक्त करता है | ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण शर्मा उपनाम प्रयोग करते है | झा और मिश्र (अथवा मिश्रा) मैथिल ब्राह्मणो के सबसे अधिक प्रयोग मे लाये जाने वाले उपनाम हैं | झा सिर्फ मैथिल ब्राह्मणो का उपनाम है |

सभी मैथिल ब्राह्मण चार वर्ग मे बटे है १- श्रोत्रिय , २- योग्य , ३- पंजी , ४- जयवार ईसम उपर वाला वर्ग नीचे वाले वर्ग की कन्या से विवाह करता है एैसा ईसलिये क्योकि मिथिला के राजा ने प्राचीनकाल मे गायत्री संध्या वंदन मे ब्राह्मणो को बुलाया दिन के चार प्रमुख पहरो मे ब्राह्मण पहुंचे तभी से एैसी व्यवस्था चली आरही है | पंजी व्यवस्था मिथिला के राजा के आदेश पर शुरू हुयी | यह दोनो ही प्रथाये आजकल समाप्त हो रही है |
मैथिल ब्राह्मणो के साथ साथ अन्य प्रमुख ब्राह्मण समुदाय कान्यकुब्ज ब्राह्मण , भूमिहार ब्राह्मण भी मिथिला मे है मैथिल ब्राह्मण जनकपुर मिथिला देश मे है |
सन्दर्भ

मैथिल ब्राह्मणो की पंजी व्यवस्था लेखक पं गजेन्द्र ठाकुर

Karwa Chauth Vrat Katha


बहुत समय पहले इन्द्रप्रस्थपुर के एक शहर में वेदशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वेदशर्मा का विवाह लीलावती से हुआ था जिससे उसके सात महान पुत्र और वीरावती नाम की एक गुणवान पुत्री थी। क्योंकि सात भाईयों की वह केवल एक अकेली बहन थी जिसके कारण वह अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने भाईयों की भी लाड़ली थी।



जब वह विवाह के लायक हो गयी तब उसकी शादी एक उचित ब्राह्मण युवक से हुई। शादी के बाद वीरावती जब अपने माता-पिता के यहाँ थी तब उसने अपनी भाभियों के साथ पति की लम्बी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। करवा चौथ के व्रत के दौरान वीरावती को भूख सहन नहीं हुई और कमजोरी के कारण वह मूर्छित होकर जमीन पर गिर गई।



सभी भाईयों से उनकी प्यारी बहन की दयनीय स्थिति सहन नहीं हो पा रही थी। वे जानते थे वीरावती जो कि एक पतिव्रता नारी है चन्द्रमा के दर्शन किये बिना भोजन ग्रहण नहीं करेगी चाहे उसके प्राण ही क्यों ना निकल जायें। सभी भाईयों ने मिलकर एक योजना बनाई जिससे उनकी बहन भोजन ग्रहण कर ले। उनमें से एक भाई कुछ दूर वट के वृक्ष पर हाथ में छलनी और दीपक लेकर चढ़ गया। जब वीरावती मूर्छित अवस्था से जागी तो उसके बाकी सभी भाईयों ने उससे कहा कि चन्द्रोदय हो गया है और उसे छत पर चन्द्रमा के दर्शन कराने ले आये। वीरावती ने कुछ दूर वट के वृक्ष पर छलनी के पीछे दीपक को देख विश्वास कर लिया कि चन्द्रमा वृक्ष के पीछे निकल आया है। अपनी भूख से व्याकुल वीरावती ने शीघ्र ही दीपक को चन्द्रमा समझ अर्घ अर्पण कर अपने व्रत को तोड़ा। वीरावती ने जब भोजन करना प्रारम्भ किया तो उसे अशुभ संकेत मिलने लगे। पहले कौर में उसे बाल मिला, दुसरें में उसे छींक आई और तीसरे कौर में उसे अपने ससुराल वालों से निमंत्रण मिला। पहली बार अपने ससुराल पहुँचने के बाद उसने अपने पति के मृत शरीर को पाया।
                      
अपने पति के मृत शरीर को देखकर वीरावती रोने लगी और करवा चौथ के व्रत के दौरान अपनी किसी भूल के लिए खुद को दोषी ठहराने लगी। वह विलाप करने लगी। उसका विलाप सुनकर देवी इन्द्राणी जो कि इन्द्र देवता की पत्नी है, वीरावती को सान्त्वना देने के लिए पहुँची।

वीरावती ने देवी इन्द्राणी से पूछा कि करवा चौथ के दिन ही उसके पति की मृत्यु क्यों हुई और अपने पति को जीवित करने की वह देवी इन्द्राणी से विनती करने लगी। वीरावती का दुःख देखकर देवी इन्द्राणी ने उससे कहा कि उसने चन्द्रमा को अर्घ अर्पण किये बिना ही व्रत को तोड़ा था जिसके कारण उसके पति की असामयिक मृत्यु हो गई। देवी इन्द्राणी ने वीरावती को करवा चौथ के व्रत के साथ-साथ पूरे साल में हर माह की चौथ को व्रत करने की सलाह दी और उसे आश्वासित किया कि ऐसा करने से उसका पति जीवित लौट आएगा।

इसके बाद वीरावती सभी धार्मिक कृत्यों और मासिक उपवास को पूरे विश्वास के साथ करती। अन्त में उन सभी व्रतों से मिले पुण्य के कारण वीरावती को उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।
नई दिल्ली. करवा चौथ का त्योहार देशभर में मनाया जाता है. यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय को मनाया जाता है. करवाचौथ हिंदू कैलेंडर के अनुसार पूर्णिमा के चौथे दिन पड़ता है. इस दिन शादीशुदा महिला अपनी पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. इस दिन अपने पति के कल्याण और स्वस्थ्य जीवन के लिए भगवान गणेश से अर्चना करते हैं.

करवा चौथ 2017 पूजा
इस बार करवाचौथ 8 अक्टूबर को है. इस दिन के महिलाएं अपने पति के लिए व्रत करेंगी. देश में कहीं कहीं शादी से पहले भी व्रत करने की प्रथा होती है. कहा जाता है कुंवारी लड़की अच्छे लड़के मिलने के लिए व्रत करती हैं. इस बार महिलाओं के पास पूजा करने के लिए 8 अक्टूबर को 1 घंटे और 14 मिनट का समय है.

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करवा चौथ मूर्हूत
करवा चौथ पूजा का समय शाम 5:54 pm पर शुरू होगा.
शाम 7:09 pm पर करवा चौथ पूजा करने का समय खत्म होगा.

करवा चौथ 2017 चंद्रोदय का समय
करवाचौथ पर महिलाएं चंद्रमा की पूजा करती हैं. इस दिन महिलाएं बिना चंद्रमा के पूजा संपन्न कर अपने पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं. कहा जाता है कि चाँद देखे बिना व्रत अधूरा रहता है. जबतक चांद की पूजा के कोई महिला न कुछ भी खा सकती हैं और न पानी पी सकती हैं.

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चंद्रमा की पूजा के दौरान महिलाओं को एक घेरा बनाकर बैठती हैं और फिर एक महिला 7 बार फेरी लगाकर एक-दूसरे से थाली बदलती हैं. इस फेरी के दौरान गीत गाएं जाते हैं. महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु की कामना करती जाती हैं और थाली को 7 बार फेरती जाती हैं.

इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 08:11 pm होगा.