मैं ऐसा क्यों हूँ

क्यों  खुश  हो  जाता हूँ  मैं
तुम्हारी  ख़ुशी  देखके
क्यों  हो  जाता  हूँ  मैं  हताश
तुम्हें  उदास  देखके …

 
चहक  सा  उठता  हूँ  मैं  क्यों
जब  मिलने  की  बारी  आती  हैं
पर  क्यों  मिलने  बाद  घंटो
नींद  नहीं  आती  हैं …

 
आँखें  बंद  करने  से  क्यों
याद  तुम्हारी  आती  हैं
पर  जब  खुलती  हैं  तोह
क्यों  फिर  तू  सामने  आती  हैं …

 
आँसू  टपकते  हैं
तो  मैं  क्यों  सिसकता  हूँ
जरा  सी  तू  हस्ती  हैं
तो  मैं  क्यों  निखरता  हूँ ..

जब  भी  देखता  हूँ  तुम्हे
बस  यह  सोचता  हूँ
छूपो  तुमसे  या  तुमसे  कहूँ
रखूं  दिल  में  ये  बात  या  कह  दूँ …

 
सुन  जरा  बस  इतना  बता
मैं  ऐसा  क्यों  हूँ …
हम  उनके  एक  इशारे  के इंतज़ार  में  रहे
पर  उनकी   नज़र  इस  तरफ  मुड़ी  ही  नहीं ……
अनजाने  में  उस  डोर  की  सलामती  की  दुआ  मांगते  रहे
जो  डोर  कभी  उनसे  जुडी  ही  नहीं …

तेरे  बिना  एक  पल  भी  जीया  नहीं जा   सकता ,
मरना  चाहू  भी  तो  मर  नहीं  सकता ,
तेरे  साथ  जीने  का  वडा  किया  है  मैंने ,
इस  प्यारे  से  वादे  से  मैं  मुकर  नहीं  सकता .

मन  की  मुलाक़ात  में  तमाम  मुश्किलें  आयेंगी ,फिर  भी  तुझसे  मिले  बिना  मैं  रह  नहीं  सकता ,
तुझे  क़सम  है  मेरी  मेरा  साथ  निभाना  हर  मोड़  पैर ,
तुझसे  बिछर  के  एक  कदम  भी  मैं  चल
नहीं सकता .

क्या ज़माना था


के  हम  रोज़  मिला  करते  थे ,
रात  भर  चाँद  के  हमराज़  फिरा  करते  थे ,
देख कर  जो  हमें  चुप  चाप  गुज़र  जाते  है ,

कभी  उस  शख्स  से  हम  प्यार  किया  करते  थे .
कोई  साथ  ना  दे  मेरा ,चलना  मुझे  अता  है .
हर  आग  से  वाकिफ  हूँ ,जलना  मुझे   अता  है

यूँ  तो  गुज़र  रहा  है , हर  इक  पल  ख़ुशी  के  साथ ,
फिर  भी  कोई  कमी  सी  है , क्यों  ज़िन्दगी  के  साथ

रिश्ता  वफायें  दोस्ती , सब  कुछ  तो  पास  है ,
क्या  बात  है  पता  नहीं , दिल  क्यूँ  उदास  है ,
हर  लम्हा  है  हसीं , नयी  दिलकशी  के  साथ ,
फिर  भी  कोई  कमी  सी  है , क्यों  ज़िन्दगी  के  साथ

चाहत  भी  है  सुकून  भी  है  दिलबरी  भी  है ,
आँखों  में  खवाब  भी  है , लबों  पर  हंसी  भी  है ,
दिल  को  नहीं  है  कोई , शिकायत  किसी  के   साथ ,
फिर  भी  कोई  कमी   सी  है , क्यूँ  ज़िन्दगी  के  साथ

सोचा  था  जैसा  वैसा  ही  जीवन  तो  है  मगर ,
अब  और  किस  तलाश  में  बैचैन  है  नज़र ,
कुदरत  तो  मेहरबान  है , दरयादिली  के  साथ ,
फिर  भी  कोई  कमी  सी  है , क्यूँ  ज़िन्दगी  के  साथ  

उड़  के  करना  क्या   है ?
जब  येही  जीना  है  दोस्तों  तो  फिर  मरना  क्या है ?
पहेली  बारिश  में  ट्रेन  लेट  होने  की  फ़िक्र  है
भूल  गए  भीगते  हुए  तहेलना  क्या  है ?
सेरैल्स  के  किरदारों  का  सारा  हाल  है  मालूम
पर  माँ  का  हाल  पूछने  की  फुर्सत  किसे  है ?






दिल दुखता है




मेरे  नाक  से  तेरे  जिस्म  की  खुसबू  न  गई
दिल  से  वो  पहली  मुलाक़ात  की  रंगत  न  गई
तेरे  होटओं  पे  अभी  रंग -इ -हिना  दीखता  है
ऐ  मेरी  जान  तेरे  जिगर मेरा   दिल  दुखता  है

याद  आती  है  तेरी  अश्क  बहलता  हूँ
तेरी  तस्वीर  को  सिने  से  लगालेता  हूँ
दिन  तो  कट  जाता  है  पर  रात  तहर  कटती है
अश्क  आंखों  से  बहता  हूँ  तो  धल्जती  है

भोके  बचाओं  की  तरह  दिलको  दगा  देता  हूँ
खली  हांड़ी  के  टेल  आग  लगा  लेता  हूँ
जाने  क्यों  प्यार  का  कोई  वक़्त  नहीं  होता  है
अपने  ही  आपसे  दिल  जाने  कहाँ  खोता  है

सिने  माय  दर्द  भी  उठते  हैं  बिना  नोतिसे  के
सुख  से  जीता  था  जो  कल  आज  वही  रोता  है
साडी  बेचैनियों  को  झेल  के  भी  आठ  पहर
उसकी  ही  शकल  को  आंखों   सजा  लेता  है

प्यार



हर  कोई  प्यार  के   लिए  तड़पता  है ….
हर  कोई  प्यार  के   लिए  रोता  है ….
ऐ  दोस्त  ये  दोस्ती  सदा   कायम   रखना …
क्यूंकि  सबसे  ज्यादा  प्यार  इस  दोस्ती  में  हे  होता  है …
`
ए  मोहब्बत  तेरे  अंजाम  पे  रोना  आया
जाने  क्यों  आज  तेरे  नाम  पे  रोना  आया
यूँ  तो  हर  शाम  उमीदों  में  गुज़र  जाती  है
आज  कुछ  बात  है  जो  शाम  पे  रोना  आया
`
तुम  हंसो  तो  खुसी  मुझे  होती  है ,
तुम  रोड़ो  तो  आँखें   मेरी  रोटी  हैं .
महसूस  कर  के  देख  लो …..
दोस्ती ऐसे  ही  होती  है …
`
गीत  की  ज़रुरत  महफ़िल  में  होती  है
प्यार  की  ज़रुरत  दिल  में  होती  है
बिन  दोस्ती  के  अधूरी  है  यह  ज़िन्दगी
क्यूंकि  दोस्त  की  ज़रुरत  हर  पल  महसूस  होती  है
`
हर  रिश्तोंके  मुकाम  नहीं  होते …
दिल  के  रिश्तोंके  कोई  नाम  नहीं  होते ……
पाया  है  आपको  दिल  की  रौशनी  से ……….
आप  जैसे  दोस्त  किसीके  लिए  आम  नहीं  होते …….. .
`
आपकी  दोस्ती  की  एक  नज़र  चाहिए ;
दिल  है  बेघर  उसे  एक  घर  चाहिए
बस  यूँ  ही  साथ  चलते  रहो  ऐ  दोस्त ;
यह  दोस्ती  हमे  उम्र  भर  चाहिए .
`
दोस्त  है  तो  आंसुओ  की  भी  शान  होती  है ,
दोस्त  न  हो  तो  महफ्हिल  भी  कब्रिस्तान  होती  है ,
सारा  खेल  तो  दोस्ती  का  ही  है ,
वरना  मय्यत  और  बारात  एक  सामान  होती  है .
`
ज़िन्दगी  में  जब  मायूस  हुए  हम …..
तो  सोचा  के   क्या  पाया  क्या  खोया …….
खोने  का  तो  हिसाब  न  लगा  पाए …
याद  रहा  तो  बस  इतना …के …
ज़िन्दगी  से  भी  प्यारा ..आप  जैसा  एक  दोस्त  पाया …
`
सफ़र  लम्बा  है  दोस्त  बनाते  रहिये ,
दिल  मिले  न  मिले  हाथ  बढ़ाते  रहिये ,
ताज  न  बनाइये  कोस्त्ली  पड़ेगा ,
हर  तरफ  मुमताज  बनाते  रहिये .
`
न  ख्वाबों  में  देखा , न  नज़रों  में  देखा ,
हजारों  में  एक  हमने  तुम  ही  को  देखा ,
गम  देने  वाले  तो  हर  पल  है  यहाँ ,
हर  पल  ख़ुशी  देने  वालों  में  एक  आप  ही  को  देखा …