मुसकान

तुम ज़िदगी ना सही
दोस्त बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम हसी ना सही
मुसकान बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

 

तुम हकीकत ना सही
खयाल बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम नज़र ना सही
याद बनकर तो ज़िदगी मे आओ।


 

तुम दिल ना सही
धड़कन बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम गज़ल ना सही
सायरी बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

 

तुम खुशिया ना सही
गम बनकर तो ज़िदगी मे आओ
तुम पास ना सही
एहसस बनकर तो ज़िदगी मे आओ।

मुकद्रदर बनाते है



इतना ना चाहों की भूला ना सके

इतना ना पास आओं की दूर ना जा सकों

तन्‍हाई में बैठकर ये सोचते है हम

कि ना चाहों उसकी जीसे पा ना सको ”

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जुदाई आपकी रूलाती रहेगी

याद आपकी आती रहेगी

पल पल जान जाती रहेगी

जब तक जिस्‍म में है जान सांस आपसे प्‍यार निभाती रहेगी”

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santoshkumarjh

भूल में भी किसी को ना रूलाना

जिन्‍दगी में सबकों हॅसाना

दुश्‍मन को  भी गले लगाना

फिर भी कोई गम हो तो इस बेब पेज को पढ लेना”

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santoshkumarjha

दुआवों में इक दुआ हमारी

जिसमें मांगी हमने हर खुशी तुम्‍हारी

जब भी मुस्‍कुराओं दिल से

समझों कबूल दुआ हमारी ”

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ये दुरियॉ अजीब सी लगती है

अपनी बात हुये मुददत सी लगती है

तुम्‍हारी दोस्‍ती अब जरूरत सी लगती है ”

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santoshkumar

हमारे दिल में धरकन  आपकी सुनाई देती है

आखों में सूरत उनकी दिखाई देती है

चलते तो हम है लेकिन

जब मुडते है तो पंरछाई आपकी दखिई देती है”

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ना छुपाना कोई बात दिल में हो अगर

रखना थोडा भरोसा तुम हम पर

हम निभायेगें दोस्‍ती का रिश्‍ता इस कदर

कि भूलाने पर भी ना भूला पायेगें हमें जिन्‍दीभर”

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santoshkumar

दोस्‍ती दिल है दिमाग  नहीं

दोस्‍ती सोच है आवाज नहीं

कोई आखों से नहीं देख सकता दोस्‍ती के जज्‍बे

क्‍योंकि दोस्‍ती अहसास है अन्‍दाज नहीं”

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santoshkumarj
तुझे ही आना मुकद्रदर बनाते है हम

खुदा से पहले तेरे आगे सर झुकाते है हम

दोस्‍ती का रिश्‍ता कभी तोड ना देना

जिस रिश्‍ते के दम पर मुस्‍कुराहते है हम ”

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santoshkumar


खुशी आपके लिये गम मेरे लिय

जिन्‍दगी आपके लिये मौन मेरे लिय

मुस्‍कुराना आपके लिये आंसू मेरे लिये

सब कुछ आपके लिए और आप सिर्फ मेरे लिये ”

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santoshkumar

तेरी दोस्‍ती में इक नशा है

तभी तो ये सारी दुनिया हमसे खफा है

ना करों हमसे इतनी दोस्‍ती

कि दिल ही हमसे पूछे तेरी घडकन कहॅ हैं ”

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santoshkumar

हर कभी तुझसे खुश्‍बू उधार मांगे

आफता तुमसे नूर उधार मांगे

रब करके तु दोस्‍ती ऐसी निभाये

कि लोग मुझसे तेरी दोस्‍ती उधार मांगे”

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भूलाना तुम्‍हे ना आसान होगा

बुढा आदमी

एक  बुढा  आदमी गाँव मेँ रहता था,
उसे को रिस्तेदार या बालक नहीँ था।

 एक दिन उसे मन आय कि धुमने को जाऊ गरमी दिन था।
 एक गठरी बनाया ओर चल दिया।

चलते-चलते बहुत दूर दुसरे गाँव पहुचा वहाँ एक आदमी नहीँ दिखा दिन के बारह बजे थे।
धुप तेज था प्यास लगे थेँ।

बुढा आदमी ने सोचा के लोग कहाँ चलेगे कुछ बच्चा एक पङे निचे खेल रहे थे।
 बच्चे बोला अरे बेट पानी पिला दे।

बच्चे पानी ला के दिया। बुढा आदमी ने बच्चे से पुछा अरे बेटा तेरा गाँव के बङे लोग कहाँ बच्चे ने बोला यहाँ लोग परदेश रहे हे।

इस लिऐ। बुढा आदमी ने वहाँ से आगे चला शाम टाईम हो रहा था।
 कुछ दूर आगे मन्दिर दिखाई दिया  बुढा  आदमी ने सोच रात मेँ यहाँ बिताऐ।
मन्दिर पर पहूचे वहाँ पाँच पडित रहते थे।

बुढा आदमी से पुछा आप कहाँ से आऐ हो  बुढा  आदमी ने बोला मेँ अपनी गाँव से आऐ।

उस आदर सतकार किया  बुढा  आदमी सुबह उठकर स्नाण पुजा खान खा के वहाँ से चला रास्ते चलते चलते रास्ते तबियत खराब हो गया।

तब वहाँ एक लकङीहार आऐ उस बुढा आदमी को पानी पिलाया पानी ते  बुढा आदमी मर गया लकङीहार उसे बुढा आदमी उटा कर जला कर किरिया क्रम किया