शिवरात्रि की रात में पूजा विशेष फलदायी

शिवरात्रि की रात में पूजा विशेष फलदायी
प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मास शिवरात्रि कहा जाता है। इन शिवरात्रियों में सबसे प्रमुख है फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी जिसे महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि महाशिवरात्री की रात में देवी पार्वती और भगवान भोलेनाथ का विवाह हुआ था इसलिए यह शिवरात्रि वर्ष भर की शिवरात्रि से उत्तम है।
महाशिवरात्रि के विषय में मान्यता है कि इस दिन भगवान भोलेनाथ का अंश प्रत्येक शिवलिंग में पूरे दिन और रात मौजूद रहता है। इस दिन शिव जी की उपासना और पूजा करने से शिव जी जल्दी प्रसन्न होते हैं। शिवपुराण के अनुसार सृष्टि के निर्माण के समय महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि में शिव का रूद्र रूप प्रकट हुआ था।
सृष्टि में जब सात्विक तत्व का पूरी तरह अंत हो जाएगा और सिर्फ तामसिक शक्तियां ही रह जाएंगी तब महाशिवरात्रि के दिन ही प्रदोष काल में यानी संध्या के समय ताण्डव नृत्य करते हुए रूद्र प्रलय लाकर पूरी सृष्टि का अंत कर देंगे। इस तरह शास्त्र और पुराण कहते हैं कि महाशिवरात्रि की रात का सृष्टि में बड़ा महत्व है। शिवरात्रि की रात का विशेष महत्व होने की वजह से ही शिवालयों में रात के समय शिव जी की विशेष पूजा अर्चना होती है।
ज्योतिष की दृष्टि से भी महाशिवरात्रि की रात्रि का बड़ा महत्व है। भगवान शिव के सिर पर चन्द्रमा विराजमान रहता है। चन्द्रमा को मन का कारक कहा गया है। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात में चन्द्रमा की शक्ति लगभग पूरी तरह क्षीण हो जाती है। जिससे तामसिक शक्तियां व्यक्ति के मन पर अधिकार करने लगती हैं जिससे पाप प्रभाव बढ़ जाता है। भगवान शंकर की पूजा से मानसिक बल प्राप्त होता है जिससे आसुरी और तामसिक शक्तियों के प्रभाव से बचाव होता है।
रात्रि से शंकर जी का विशेष स्नेह होने का एक कारण यह भी माना जाता है कि भगवान शंकर संहारकर्ता होने के कारण तमोगुण के अधिष्ठिता यानी स्वामी हैं। रात्रि भी जीवों की चेतना को छीन लेती है और जीव निद्रा देवी की गोद में सोने चला जा जाता है इसलिए रात को तमोगुणमयी कहा गया है। यही कारण है कि तमोगुण के स्वामी देवता भगवान शंकर की पूजा रात्रि में विशेष फलदायी मानी जाती है।
महाशिवरात्रि पर अपनी राशि के अनुसार मनाएं भोलेनाथ को
राशि के अनुसार भोलेनाथ की पूजा
महाशिवरात्रि के अवसर पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इस अवसर आप शिव जी की पूजा से लाभ पाना चाहते हैं तो अपनी राशि के अनुसार भोलेनाथ की पूजा करें।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राशि के अनुसार द्वादश ज्योर्तिलिंग का ध्यान करके शिव जी का अभिषेक और ध्यान पूजन करने से विशेष लाभ मिलता है।
महाशिवरात्रि पर अपनी राशि के अनुसार मनाएं भोलेनाथ को
मेष राशि वाले ऐसे करें शिव की पूजा
द्वादश ज्योर्तिलिंगों में सोमनाथ ज्योर्तिलिंग पहला ज्योर्तिलिंग है। जिनका जन्म मेष राशि में हुआ है उन्हें महाशिवरात्रि के दिन सोमनाथ ज्योर्तिलिंग की पूजा करनी चाहिए।
जिनके लिए इस दिन सोमनाथ का दर्शन और पूजन करना कठिन हो वह अपने पास के शिव मंदिर में जाकर सोमनाथ का ध्यान करते हुए दूध से शिव को स्नान कराएं और स्नान के बाद शिव जी को शमी के फूल और पत्तियां चढ़ाएं।
मेष राशि शिव मंत्र
शिव की पूजा के बाद 'ह्रीं ओम नमः शिवाय ह्रीं'। इस मंत्र का 108 बार जप करें।
इस विधि से छात्र पूजा करें तो शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। गृहस्थों को सुख-शांति मिलती है। जो लोग अपना घर बनाने का सपना संजोए बैठे हैं उनके प्रयास में आने वाली बाधा दूरी होती है।
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वृष राशि वाले करें दूसरे ज्योतिर्लिंग की पूजा
शैल पर्वत पर स्थित मल्लिकार्जुन वृष राशि के स्वामी हैं। इस राशि के व्यक्तियों को मल्लिकार्जुन का दर्शन करना चाहिए।
लेकिन जो लोग मल्लिकार्जुन का दर्शन करने नहीं जा सकते उनके लिए शिव की कृपा पाने का सबसे आसान तरीका है महाशिवरात्रि के दिन किसी भी शिवलिंग की पूजा गंगाजल से करें। शिवलिंग पर आक का फूल और पत्ता चढ़ाएं।
वृष राशि के लिए मंत्र
इस राशि के व्यक्ति मल्लिकार्जुन का ध्यान करते हुए ' ओम नमः शिवाय' मंत्र का जप करें।
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मिथुन राशि के लिए प्रभावशाली ज्योतिर्लिंग
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मिथुन राशि के स्वामी हैं। महाकालेश्वर कालों के भी काल हैं। इनकी पूजा करने वाले को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
इस राशि में जन्म लेने वाले व्यक्ति को महाकालेश्वर का दर्शन करना चाहिए। महाशिवरात्रि के दिन इस राशि के व्यक्ति महाकालेश्वर का दर्शन करें तो पूरे वर्ष संकट से मुक्त रहते हैं।
जो लोग इस दिन महाकालेश्वर का दर्शन नहीं कर पाएं वे महाकालेश्वर का ध्यान करते हुए किसी शिवलिंग को दूध में शहद मिलाकर स्नान कराएं और बिल्वपत्र एवं शमी के पत्ते चढ़ाएं।
मिथुन राशि के लिए शिव मंत्र
महाकालेश्वर का ध्यान करते हुए 'ओम नमो भगवते रूद्राय' मंत्र का यथासंभव जप करें।
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कर्क राशि वाले करें ओंकारेश्वर की पूजा
मध्य प्रदेश में नर्मदा तट पर बसा ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग का संबंध कर्क राशि से है। इस राशि वाले महाशिवरात्रि के दिन शिव के इसी रूप की पूजा करें। ओंकारेश्वर का ध्यान करते हुए शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद अपामार्ग और विल्वपत्र चढ़ाएं।
कर्क राशि के लिए शिव मंत्र
शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए 'ओम हौं जूं सः'। इस मंत्र का जितना संभव हो जप करें।
इस प्रकार शिव जी की पूजा करने से राशि के स्वामी चन्द्रमा को बल मिलेगा जिससे सेहत अच्छी रहेगी। मानसिक परेशानियों एवं चिंताओं का निदान होगा। इस प्रकार शिव की पूजा करने से भौतिक सुख के साधनों में वृद्घि होती है।
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सिंह राशि वाले करें बाबा वैद्यनाथ की पूजा
इस राशि के व्यक्ति वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा करें। महाशिवरात्रि के अवसर पर वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की विशेष पूजा होती है जिसमें शिव पार्वती का विवाह होता है।
महाशिवरात्रि के दिन सिंह राशि वाले वैद्यनाथ ज्योर्तिलिंग का दर्शन करें तो पूरे वर्ष सेहत अच्छी रहती है। वैद्यानाथ ज्योर्तिलिंग का दर्शन जिन्हें प्राप्त न हो वह किसी भी शिवलिंग की पूजा गंगा जल से करें और सफेद कनेर का फूल चढ़ाएं। बाबा बैद्यनाथ को भांग व धतूरा बहुत पसंद है इसका भोग लगाएं।
सिंह राशि के लिए शिव मंत्र
'ओम त्र्यंबकं यजामहे सुगंधि पुष्टिवर्धनम। उर्वारूकमिव बन्ध्नान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। इस मंत्र का कम से कम 51 बार जप करें।
इस प्रकार शिव की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है। सामाजिक प्रतिष्ठा और यश की प्राप्ति होती है। सरकारी नौकरी एवं सरकार से जुड़े कार्यों में आने वाली बाधा दूर होती है। विवाह योग्य कन्याओं की शादी के योग मजबूत होते हैं।
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भीमाशंकर की पूजा करें कन्या राशि वाले
महाराष्ट्र में भीमा नदी के किनारे बसा भीमाशंकर ज्योर्तिलिंग कन्या राशि का ज्योर्तिलिंग हैं। इस राशि वाले भीमाशंकर को प्रसन्न करने के लिए दूध में घी मिलाकर शिवलिंग को स्नान कराएं। इसके बाद पीला कनेर और शमी के पत्ते चढाएं।
कन्या राशि के लिए शिव मंत्र
'ओम नमो भगवते रूद्राय' मंत्र का यथासंभव जप करें। इस प्रकार शिव की पूजा करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। बड़े भाई-बहनों के सहयोग में वृद्घि होती है। मित्रों से अच्छे संबंध बने रहते हैं। पूरे वर्ष विभिन्न स्रोतों से धन लाभ होता रहता है।
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रामेश्वर ज्योर्तिलिंग की पूजा करें तुला राशि वाले
तमिलनाडु स्थित भगवान राम द्वारा स्थापित रामेश्वर ज्योर्तिलिंग का संबंध तुला राशि से है। भगवन राम ने सीता की तलाश में समुद्र पर सेतु निर्माण के लिए इस ज्योर्तिलिंग की स्थापना की थी।
महाशिवरात्रि के दिन इनके दर्शन से दांपत्य जीवन में प्रेम और सद्भाव बना रहता है। जो लोग इस दिन रामेश्वर ज्योर्तिलिंग का दर्शन नहीं कर सकें वह दूध में बताशा मिलाकर शिवलिंग को स्नान कराएं और आक का फूल शिव को अर्पित करें।
शिव पंचाक्षरी मंत्र 'ओम नमः शिवाय' का 108 बार जप करें। इस प्रकार शिव की पूजा करने से कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधा दूर होती है। पिता के साथ मधुर संबंध बने रहते हैं।
सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्घि होती है। जो लोग अभिनय अथवा संगीत की दुनिया में कैरियर बनाना चाहते हैं उनके लिए इस प्रकार शिव की पूजा करना लाभप्रद रहता है।
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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करें वृश्चिक राशि वाले
गुजरात के द्वारका जिले में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग है जिसका संबंध वृश्चिक राशि से है। इस राशि वालों को गले में नागों की माला धारण करने वाले नागों के देव नागेश्वर ज्योर्तिलिंग की पूजा करनी चाहिए।
महाशिवरात्रि के दिन इनका दर्शन करने से दुर्घटनाओं से बचाव होता है। जो लोग इस दिन नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन न कर सकें वह दूध और धान के लावा से शिव की पूजा करें। शिव को गेंदे का फूल, शमी एवं बेलपत्र चढाएं।
वृश्चिक राशि के लिए शिव मंत्र
ह्रीं ओम नमः शिवाय ह्रीं। मंत्र का जप करें। इस राशि वालों के भाग्य के स्वामी चन्द्रमा हैं जो शिव के सिर पर सुशोभित हैं।
महाशिवरात्रि के दिन इस प्रकार शिव की पूजा करने से भाग्योन्नति होती है। पिता से धन का लाभ होता है। भौतिक सुखों की कामना रखने वालों का धन वैभव बढ़ता है।
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बाबा विश्वनाथ की पूजा करें धनु राशि वाले
वाराणसी स्थित विश्वनाथ ज्योर्तिलिंग का संबंध धनु राशि से है। इस राशि वाले व्यक्ति महाशिवरात्रि के दिन गंगाजल में केसर मिलाकर शिव को अर्पित करें। विल्वपत्र एवं पीला अथवा लाल कनेर शिवलिंग पर चढ़ाएं।
धनु राशि के लिए शिव मंत्र
महाशिवरात्रि के दिन चन्द्रमा कमजोर रहता है। इस राशि वाले ओम तत्पुरूषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रूद्रः प्रचोदयात।। इस मंत्र से शिव की पूजा करें। इससे चन्द्रमा को बल मिलता है और शिव कृपा भी प्राप्त होती है।
इस प्रकार शिव की पूजा करने से अचानक होनी वाली क्षति और मानसिक चिंताओं से मुक्ति मिलती है। स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आकस्मिक संकटों से बचाव होता है।
महाशिवरात्रि पर अपनी राशि के अनुसार मनाएं भोलेनाथ को
त्रयम्बकेश्वर की पूजा करें मकर राशि वाले
मकर राशि का संबंध त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग से है। यह ज्योतिर्लिंग नासिक में स्थित है। महाशिवरात्रि के दिन इस राशि वाले गंगाजल में गुड़ मिलाकर शिव का जलाभिषेक करें। शिव को नीले का रंग फूल और धतूरा चढ़ाएं।
मकर राशि के लिए मंत्र
त्रयम्बकेश्वर का ध्यान करते हुए 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का 5 माला जप करें। जो लोग विवाह करना चाह रहे हैं उनकी शादी में आने वाली बाधा दूर होती है और सुन्दर एवं सुयोग्य जीवनसाथी मिलता है।
दांपत्य जीवन के तनाव कम होता है। साझेदारी में व्यवसाय करने वालों की साझेदारी मजबूत होती है और लाभ बढ़ता है।
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केदारनाथ की पूजा करें कुंभ राशि वाले
इस राशि वालों को उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ की पूजा करनी चाहिए। अक्षय तृतीया से केदारनाथ की यात्रा आरम्भ होती है इसलिए महाशिवरात्रि पर केदारनाथ का दर्शन नहीं किया जा सकता है।
इसलिए कुंभ राशि वाले व्यक्ति महाशिवरात्रि के दिन अपने आस पास के किसी शिवालय में जाकर केदारनाथ का ध्यान करते हुए शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद कमल का फूल और धतूरा चढ़ाएं।
कुंभ राशि के लिए मंत्र
कुंभ राशि के स्वामी भी शनि देव हैं इसलिए इस राशि के व्यक्ति भी मकर राशि की तरह 'ओम नमः शिवाय' का जप करें। जप के समय केदरनाथ का ध्यान करें। इस प्रकार महाशिवरात्रि के दिन शिव की पूजा करने से पूरे वर्ष सेहत अच्छी रहती है।
शत्रुओं एवं विरोधियों का डर नहीं रहता है। मामा मामी एवं मौसी के साथ अच्छे संबंध रहते हैं और जरूरत के समय इनसे लाभ मिलता है।
महाशिवरात्रि पर अपनी राशि के अनुसार मनाएं भोलेनाथ को
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करें मीन राशि वाले
महाराष्ट्र के औरंगाबाद में घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है। इस ज्योर्तिलिंग का संबंध मीन राशि से है। इस राशि वाले महाशिवरात्रि के दिन दूध में केसर डालकर शिवलिंग को स्नान कराएं। स्नान के पश्चात शिव को गाय का घी और शहद अर्पित करें। कनेर का पीला फूल और विल्वपत्र शिव को चढ़ाएं।
मीन राशि के लिए शिव मंत्र
ओम तत्पुरूषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रूद्र प्रचोदयात।। इस मंत्र का जितना अधिक हो सके जप करें। इस राशि वाले इस वर्ष ढ़ैय्या के प्रभाव में रहेंगे।
इस प्रकार शिवरात्रि के दिन शिव लिंग की पूजा करने से शनि के कुप्रभाव से बचेंगे। आत्मविश्वास में वृद्घि होगी। स्वस्थ्य संबंधी समस्यओं में कमी आएगी। छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्ति में आसानी होगी।
फूलों से सजाएं अपनी किस्मत
भगवान ने फूलों को इसलिए नहीं बनाया है कि वह खिले और अगले दिन मुरझाकर खत्म हो जाए। फूल इसलिए भी नहीं हैं कि आप उन्हें भगवान के ऊपर चढ़ाकर अगले दिन निर्माल बनाकर फेंक दें।
फूलों में भी बड़ी चमत्कारी शक्तियां होती हैं जो आपकी किस्मत बदल सकती है।

सरस्वती माता आरती

                 सरस्वती माता आरती
जय सरस्वती माता जय जय हे सरस्वती माता, सदगण वैभव शालिनी त्रिभवन ववख्याता ॥  जय सरस्वती माता ॥
चंद्रवदनन पदमालसनी घनत मंगिकारी, सोह शभ हंस सवारी अति तेजधारी ॥ जय सरस्वती माता ॥ बाय कर म वीणा दाय कर म मािा, शीश मकट मणी सोह गि मोनतयन मािा ॥  जय सरस्वती माता ॥ देवी शरण जो आय उनका उद्धार ककया
सरस्वती माता आरती  पैठी मंथरा दासी रावण संहार ककया ॥ जय सरस्वती माता ॥ ववद्या ज्ञान प्रदानयनी ज्ञान प्रकाश भरो,  मोह और अज्ञान नतलमर का जग से नाश करो ॥ जय सरस्वती माता ॥ धप ददप फि मेवा मााँ स्वीकार करो, ज्ञानचक्षु दे माता भव से उद्धार करो ॥ जय सरस्वती माता ॥ मााँ सरस्वती जी की आरती जो कोई नर गाव,  दहतकारी सखकारी ग्यान भक्ती पाव जय सरस्वती माता ॥ जय सरस्वती माता जय जय हे सरस्वती माता, सदगण वैभव शालिनी त्रिभवन ववख्याता॥  जय सरस्वती माता