आज इंसान

एक इंसान
इंसान कभी मन नही भरता प्यार पैसा जमीन मगर इंसान को जन्म से ले कर मरने तक  
फिर मरने पर कोई नही बेटे पत्नी आदि तक नही होता हे पर इंसान हाय हाय करता रहता हैं पर इंसान को कुछ अच्छा काम करने के लिय भेजे हे पर इंसान कर नही पता पर इंसान को भगबान के एक रूप हैं मगर इंसान तो भगबान को मानते ही नही कहते की जो दिखता वह ही हे मगर हबा तो नही दिखता तो हबा तो हैं  फिर तो माँ बाप जो आप जन्म दिया मेहनत कर के पढाया और तुमने तो इंसान को जो इंसान खाना नही खिलते मंदिर में भड़ारा करते और नोकर बाना कर रखते इंसान को भगबान मने की बात दूर की बात हे पर बहूत इंसान माँ बाप को तो देखते ही नही पर मन्दिर रोज जाते हे  अपने घर में रोज बीबी एक हर बात मानते हे पर कोई भी लाचार इंसान को मददत करना चहिऎ पर करण ढूदते हे आज इंसान

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